70 के दशक तक वर्तमान से दोगुना ज्यादा व सुंदर चारागाह था धमातोली का मैदान
90 के दशक में मैदान को क्षेत्र के विकास का केंद्र बनाने मोटर मार्ग से जोड़ा था
गोविंद आर्य
घनसाली। धमातोली का मैदान 70 के दशक तक वर्तमान से दोगुना ज्यादा सुंदर चारागाह था। हर वर्ष 10 गते असूज पशु चुगान के लिए मैदान खोला जाता था। 90 के दशक में जब हुलानाखाल-अखोडी मोटर मार्ग स्वीकृत हुआ, तब स्व.श्री चन्द्र सिंह रावत जी ने इस मैदान को क्षेत्र के विकास का केंद्र बनाने के उद्देश्य से मोटर मार्ग का सर्वे मैदान के पास से करवाया था। मूल सर्वे मैदान के ऊपरी किनारे से था, लेकिन मैदान को अतिक्रमण से बचाने के लिए सड़क निर्माण बाहरी किनारे से कराया गया। इस मैदान के चारों तरफ हो रहे अतिक्रमण को रोकने के लिए श्री चन्द्र सिंह रावत जी ने अकेले संघर्ष किया था। मुकदमें झेले, विरोध झेला और अपमान भी सहना पड़ा, लेकिन धमातोली मैदान को अतिक्रमण और नुकसान पहुंचाने से रोका। उसके बाद उन्होंने लखनऊ और दिल्ली जाकर, आदरणीय मातबर सिंह कंडारी जी के माध्यम से तत्कालीन टिहरी सांसद श्री ब्रह्मदत्त जी के सहयोग से केंद्रीय खेल मंत्री श्रीमती मार्गेट अल्वा जी से मिन्नी स्टेडियम स्वीकृत करवाया था।
मातवर सिंह कंडारी जी के प्रयास से केदारसिंह फोनिया जी ने रखी थी मिन्नी स्टेडियम की शिला
तत्कालीन पर्वतीय विकास मंत्री श्री मातवर सिंह कंडारी जी के प्रयास से प्रदेश के खेल मंत्री श्री केदार सिह फोनिया जी की उपस्थिति में धमातोली मिन्नी स्टेडियम का उद्घाटन हुआ था। यहां तब मिन्नी स्टेडियम की पट्टिका भी लगाई गई थी। उसके बाद किसी ने भी इस कार्य को आगे बढ़ाने का काम नहीं किया, जबकि हर प्रतिनिधि वहां से गुजरता था। अब उद्घाटन पट्टिका भी विलुप्त हो गई है। धमातोली मैदान सुरक्षित रहने के कारण आज विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का केंद्र है। इस मैदान के कारण ही धमातोली का विकास हुआ। जिसका लाभ स्थानीय लोगों को मिल रहा है। हालांकि अब जो लोग वहां पर होने वाले हर निर्माण कार्य में हिस्सेदार रहते हैं, वही इस मैदान को संरक्षित रखने के लिए अकेले संघर्ष करने वाले ब्यक्ति की छवि को कमजोर करने का प्रयास करते रहते हैं।
निम्नीकरण से लेकर हाई स्कूल तक उच्चीकरण के ऐसे किए गए प्रयास
स्कूल के निम्नीकरण का किसी ने संज्ञान नहीं लिया। पूर्व क्षेत्र पंचायत श्रीमती भारती रावत जी स्कूल का जूनियर से हाई स्कूल के उच्चीकरण के संबंध में जिलाधिकारी, शिक्षा निदेशक, सचिव से अनेकों बार व वित्तमंत्री एवं मुख्यमंत्री जी से मिलीं। इस कार्य को आगे बढ़ाने में हडियांणा के मूल निवासी श्री त्रिलोकसिंह राणा का सबसे बड़ा योगदान रहा। वे लगातार मेल और बार-बार सीएम पोर्टल पर शिकायत भेज कर विद्यालय की उच्चीकरण की मांग करते रहे। त्रिलोक राणा जी ने उत्तराखंड सरकार के सचिव, निदेशक, जिलाधिकारी से लेकर हर संबधित ब्यक्ति से इस बारे में पत्रव्यवहार जारी रखा और विद्यालय के हाई स्कूल तक उच्चीकरण होने तक अपना प्रयास जारी रखा। जहां एक और श्रीमती भारती रावत सरकार के शिक्षा मंत्री, सचिव, निदेशक, डीएम से ब्यक्तिगत संम्पर्क करती रहीं, वहीं राणा जी ने अपनी शिकायतों और मेल से हर फाइल की प्रगति की जानकारी को लेकर सरकार पर दबाव बनाया। आखिरकार हाई स्कूल में उच्चीकरण हो गया और सभी अधिकारियों के दिमाग में धमातोली नाम बैठ गया।











