बुरा न मानो होली है!
घनसाली। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव जैसे जैसे नजदीक आ रहे हैं राज्य की हर विधानसभा क्षेत्र में चुनाव की तैयारी में जुटे नेता अपने लिए मुफीद माहौल भांपने में जुटे हैं।
हम अगर अपने क्षेत्र घनसाली विधानसभा की बात करें तो घनसाली में जब से क्षेत्र की मांगों को लेकर घनसाली जन संघर्ष मोर्चा बना है, तब से क्षेत्रीय विधायक शक्तिलाल शाह और पूर्व विधायक भीमलाल आर्य की रातों की नींद उड़ी हुई है!
घनसाली के वर्तमान विधायक संतोषी प्रवृत्ति के होने के कारण वो पार्टी और भाजपा के राष्ट्रीय चेहरे के भरोसे हैं! विधायक शक्तिलाल जी को चुनाव जीतने की नहीं, सिर्फ 2027 में अपना टिकट बचाने की चुनौती है! आगामी विधानसभा चुनाव में जिन विधायकों के टिकट पर तलवार लटकी है उनमें घनसाली के विधायक भी शामिल बताए जा रहे हैं! इसलिए विधायक शक्तिलाल शाह जी की लड़ाई चुनाव जीतने की बिल्कुल भी नहीं है, बल्कि 2027 में पार्टी से सिर्फ तीसरी बार टिकट हासिल करने की है, यदि वो इसमें सफल हो गए तो उन्हें जीत हार की उतनी ज्यादा परवाह नहीं है, वो चिंता कर्मठ कार्यकताओं की रहेगी! विधायक शक्तिलाल जी शाह ने निश्चित तौर पर घनसाली में जो निविदा (टेंडर) वाले काम किये हैं वह राज्य बनने के बाद अन्य पूर्व जनप्रतिनिधि नहीं कर पाए हैं, किंतु जानकारों का कहना है कि वे ठेकेदारों के ऐसे मकड़जाल में उलझ गए हैं कि इससे बाहर आना अब उनके लिए आसान नहीं है, इसलिए घनसाली का विकास भी जनता के लिए अच्छे अस्पताल, केंद्रीय विद्यालय, कौशल विकास केंद्र, पर्यटन क्षेत्र, आईटीआई और अन्य दीर्घकालिक योजनाओं के अलावा तत्कालिक ‘टेंडर’ आधारित योजनाओं के इर्दगिर्द घूम रहा है! इसके चलते कई बार घनसाली के विकास की दूरदृष्टि रखने वाले और शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच रखने वाले लोग पार्टी में ही किसी दूसरे चेहरे को सक्रिय करने की अंदरखाने जब तब कोशिश करते दिखाई देते रहे हैं। हालांकि वर्तमान विधायक इस बात पर जोर लगाने में लगभग अभी तक सफल हुए हैं कि कोई नई एंट्री उनके लिए चुनौती न बन जाए! उनकी इसी सफलता की कड़ी में भाजपा में प्रवेश के लिए भीमलाल आर्य के शीर्ष से लेकर जमीन तक के ऐड़ी चोटी वे प्रयास अब पूरी तरह खत्म हो चुके हैं! इसलिए कांग्रेस में जीत की ओझल सम्भावना और वर्तमान में सोशल मीडिया में क्षेत्रीय दल की दमदार आहट से भीमलाल आर्य भी अब ‘पहाड़ी पहाड़ी’ करने लगे हैं।
भाजपा में पुनर्वापसी की खत्म होती सम्भावना के बाद पूर्व विधायक आर्य अब अपने वर्तमान समर्थकों, उत्तराखंड क्रांति दल की भावनाओं, वर्तमान विधायक से रुष्ट मतों के समीकरण और जीत की बदलती सम्भावना में पलटी मार ठेकेदारों के ‘मतधन’ के समीकरण में ‘पहाड़ी पहाड़ी’ राग अलापने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक भाजपा में उनकी वापसी इसी शर्त पर होनी है, जब वे भाजपा को अपने दम पर सीट जीत कर देंगे! और इस बात में कोई सन्देह नहीं है कि अगर भीमलाल जी अब एक बार ‘पहाड़ी’ विधायक बन गए तो फिर जाना कहाँ है, वो इस निर्णय लेने में चंद मिनट भी नहीं लगाएंगे!
बहरहाल, घनसाली में दोनों नेताओं की राह इतनी आसान भी नहीं है! क्षेत्र के युवा जन संघर्ष की नई मशाल लेकर घनसाली के दीर्घकालिक विकास के खोखले दावों की पोल धधकती मशाल की रोशनी से खोजखोज कर दिखा रहे हैं। इन युवाओं के 51 दिन तक संघर्ष हड़ताल करने के जज्बे और जनहित के लिए संगठित टीम के रूप में आवाज उठाने की ताकत घनसाली के चुनाव परिणाम बदलने की ओर अग्रसर होने की पहली शुरुआत है! हालांकि इनमें अभी जोश के साथ साथ एकसाथ आगे बढ़ने, सामूहिक नेतृत्व में विश्वास रखने और जनहित के लिये सतत संघर्षरत रहने की आवश्यकता है।












